ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है और फंक्शन्स

ऑपरेटिंग सिस्टम :-
ऑपरेटिंग सिस्टम एक प्रकार का प्रोग्राम होता है, जो computer तथा user के मध्य इंटरफ़ेस प्रोवाइड करने का कार्य करता है। अर्थात OS एक सिस्टम सॉफ्टवेयर है जो कंप्यूटर के प्रोसेस, मेमोरी,फाइल मैनेजमेंट, etc को व्यवस्थित करने का कार्य करता है। तथा यह हार्डवेयर के मथ्य तालमेल बिठाने का कार्य करता है।

OS को इंटरफ़ेस के आधार पर दो भागों में बांटा गया है
1. CUI (Character User Interface)
2. GUI (Graphical User Interface)

CUI :- इस प्रकार के OS में command को लिखे कर कार्य किया जाता है अर्थात किसी user को कार्य करने के लिए command लिखने पड़ते है।
उदा. :- MS-DOS(Disk Operating System), Unix etc.

GUI :- इस प्रकार के OS में किसी भी कार्य को करने के लिए graphical user interface प्रदान किया जाता है। GUI ऑब्जेक्ट्स में आइकन, कर्सर और बटन शामिल हैं। एक GUI को टेक्स्ट-आधारित कमांड-लाइन इंटरफ़ेस की तुलना में अधिक उपयोगकर्ता के अनुकूल माना जाता है.
GUI को सबसे पहले एलन के, डगलस एंगेलबर्ट और 1981 में अन्य शोधकर्ताओं के एक समूह द्वारा ज़ेरॉक्स PARC में विकसित किया गया था। बाद में, Apple ने 19 जनवरी, 1983 को GUI के साथ लिसा कंप्यूटर पेश किया।
उदा. :- Window 95,Xp, Vista, 7, 8 ,10, Linux, Mac OS, Android, Ubuntu, Chrome OS Etc..

Operating System

Functions of OS :
1. Memory Management
2. Process Management
3. Device Management
4. File Management
5. Security
6. Additional Functions of OS.

1. Memory Management : – ऑपरेटिंग सिस्टम प्राइमरी मेमोरी या मेन मेमोरी को मैनेज करता है। मुख्य मेमोरी बाइट्स या Words के एक Large Table से बनी होती है जहाँ प्रत्येक बाइट या Word को एक निश्चित एड्रेस दिया जाता है। Memory एक ऐसा storage device है. जिसे CPU के द्व्रारा एड्रेस प्रदान करवाया जाता है तथा directly access किया जा सकता है
CPU की उपयोगिता(utilization) तथा कंप्यूटर की स्पीड को बढ़ाने के लिए मेमोरी में बहुत सारे program रखे जाते है।
OS यह निर्धारित करता है की कौनसा प्रोसेस मेमोरी में लोड करना है तथा स्पेस उनके लिए available करना है यह सब OS के द्वारा ही निर्धारित किया जाता है.
OS जरूत पड़ने पर मेमोरी को allocate तथा deallocate करता है।
ऑपरेटिंग सिस्टम प्राइमरी मेमोरी या मेन मेमोरी को मैनेज करता है। मुख्य मेमोरी बाइट्स या Words के एक Large Table से बनी होती है जहाँ प्रत्येक बाइट या Word को एक निश्चित एड्रेस दिया जाता है।

2. Process Management :- प्रोसेस कंप्यूटर सिस्टम में active unit होती है। cpu में बहुत सारे प्रोसेस को एक साथ execute / Run किया जाता है.
तथा OS इन प्रोसेस के मथ्य synchronization(तालमेल) करने का तरीका प्रदान करता है।

3. Device Management :- OS की आवश्य्कता पड़ने पर device को allocate तथा deallocate करता है. तथा उपलब्थ डिवाइस को ढूंढ़ने का कार्य करता है। यह I/O scheduling को परफॉर्म करता है।
अर्थात यह डिवाइस करता है की किस डिवाइस को कोनसा प्रोसेस allocate होगा। तथा कितने समय के लिए होगा और जब प्रोसेस पूरा हो जाता है तब ऑपरेटिंग सिस्टम को द्वारा उस डिवाइस को फ्री कर दिया जाता है।

4. File Management :- कंप्यूटर इनफार्मेशन को अलग – अलग तरह से फिजिकल स्टोरेज में स्टोर कर सकता है। तब ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए फाइल मैनेजमेंट फंक्शन महत्वपूर्ण होता है.

ऑपरेटिंग सिस्टम किसी फाइल को create करने तथा डिलीट करने की सुविथा प्रदान करता है तथा साथ ही साथ किसी डायरेक्टरी को create करने तथा delete करने की facility provide करता है।
फाइल को secondary storage में मैपिंग करना तथा फाइल का suitable बैकअप लेना।

यह इस बात पर नज़र रखता है कि जानकारी कहाँ संग्रहीत है, उपयोगकर्ता एक्सेस सेटिंग्स और हर फ़ाइल की स्थिति और भी सुविधाओं को सामूहिक(collectively) रूप से फ़ाइल सिस्टम(File सिस्टम) के रूप में जाना जाता है।

5. Security : – ऑपरेटिंग सिस्टम उपयोगकर्ता डेटा और इसी तरह की अन्य तकनीकों की सुरक्षा के लिए पासवर्ड सुरक्षा का उपयोग करता है। यह कार्यक्रमों और उपयोगकर्ता डेटा तक अनधिकृत पहुंच को भी रोकता है।

6. Additional Functions of OS. : –
⏩ इसमें resouces को allocate करना।
⏩ Application program को execute /run करना ।
⏩ utility प्रोग्राम को रन करना ।
⏩ एरर detection करना ।
⏩ communication तथा नेटवर्किंग की सुविथा प्रदान ।
⏩ Accounting
⏩ Information and Resource Protection.

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